सुप्रीम कोर्ट का न्यायिक आयोग पहुंचा उल्देपुर, अवैध कॉलोनियों पर कसा शिकंजा
मेरठ में अवैध कॉलोनियों की जांच तेज, सुप्रीम कोर्ट के आयोग ने संभाला मोर्चा
मेरठ-रूड़की हाईवे के समीप उल्देपुर क्षेत्र में बिना अनुमति विकसित हुई अवैध और कच्ची कॉलोनियों की जमीनी हकीकत परखने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग गुरुवार को मौके पर पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित इस आयोग ने सर्किट हाउस में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और एमडीए तथा तहसील सदर द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्टों का बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद आयोग सीधे उल्देपुर क्षेत्र के निरीक्षण के लिए रवाना हुआ, जहां अवैध निर्माणों को देखकर अध्यक्ष ने अधिकारियों से तीखे सवाल किए।
प्रॉपर्टी डीलरों के कार्यालय और गाड़ियों पर उठे सवाल
मौका मुआयना के दौरान आयोग के अध्यक्ष ने क्षेत्र में सक्रिय प्रॉपर्टी डीलरों के कार्यालयों और बाहर खड़ी लग्जरी गाड़ियों को लेकर स्थानीय अफसरों से कड़े सवाल पूछे। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि बिना तलपट मानचित्र (लेआउट) स्वीकृत हुए इतनी बड़ी कॉलोनियां कैसे पनप गईं? जिन अवैध कॉलोनियों पर अब तक बुलडोजर या कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है, उसके पीछे के छिपे कारण क्या हैं? इस औचक निरीक्षण के बाद से भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ गई है।
जांच के पांच मुख्य बिंदु तय, मिलीभगत की खुलेगी परतें
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच के लिए पांच कड़े बिंदु निर्धारित किए हैं, साथ ही आयोग को अन्य संबंधित पहलुओं की भी जांच करने की पूरी छूट दी है। पहला बिंदु यह है कि कॉलोनियां बसाई गई जमीन सरकारी है या निजी। दूसरा, यदि निजी है तो असली मालिक कौन हैं। तीसरा, जमीन मालिकों और खरीदारों के बीच वित्तीय लेनदेन का माध्यम क्या था। चौथा, मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के अधिकारी वर्षों तक क्यों सोते रहे। और पाँचवा, क्या यह अवैध साम्राज्य अधिकारियों की मिलीभगत से खड़ा हुआ और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप, पीड़ितों में जगी न्याय की उम्मीद
गौरतलब है कि 21 सितंबर को हुई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद इस विशेष न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। आयोग के मेरठ आगमन की सूचना मिलते ही उन स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं में राहत की उम्मीद जगी है जो लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। वहीं, बुधवार को ही संयुक्त व्यापार संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कानून मंत्री से मुलाकात कर इस मामले की उच्चस्तरीय पैरवी की थी। अब देखना यह होगा कि आयोग की यह खोजी रिपोर्ट आने के बाद किन-किन भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफियाओं पर गाज गिरती है।
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