बकरियां चराने वाले विष्णु गुर्जर बने MPPSC में अधिकारी
गुना: मध्य प्रदेश के गुना जिले के एक छोटे से गांव सिंगापुरा के रहने वाले विष्णु गुर्जर ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर इतिहास रच दिया है। कभी बचपन में भेड़-बकरियां चराने और पशुओं की देखभाल करने वाले विष्णु ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पास कर सहकारिता विभाग में विस्तार अधिकारी का पद हासिल किया है। ग्रामीण इलाकों की विपरीत परिस्थितियों और संसाधनों की कमी को मात देते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। उनके इस संघर्ष और सफलता की कहानी आज के युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।
विपरीत परिस्थितियों से संघर्ष भरा सफर
विष्णु गुर्जर का जन्म मध्य प्रदेश-राजस्थान सीमा पर स्थित चाचौड़ा तहसील के सिंगापुरा गांव में हुआ था। उनके माता-पिता राममूर्ति बाई और जगदीश गुर्जर खेती और पशुपालन से जुड़े हैं और अनपढ़ होने के बावजूद उन्होंने विष्णु की शिक्षा में कभी कोई रुकावट नहीं आने दी। विष्णु ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से आठवीं तक की, फिर दसवीं पेची गांव से और 2016 में ब्यावरा से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने 2019 में जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध पीजी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और सिविल सेवा की तैयारी के लिए इंदौर का रुख किया।
तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में मिली कामयाबी
इंदौर पहुंचकर विष्णु ने MPPSC की कठिन परीक्षा की तैयारी शुरू की। साल 2020 की परीक्षा में महज 21 साल की उम्र में वे पहले ही प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना सके। इसके बाद 2021 और 2022 की परीक्षाओं में भी उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा और वे इंटरव्यू तक पहुंचकर बाहर हो गए। इस दौरान लोगों के ताने भी सुनने पड़े, लेकिन उनके पिता का अटूट विश्वास हमेशा उनके साथ रहा। आखिरकार, उन्होंने चौथे प्रयास (MPPSC 2023, जिसके परिणाम 2025 में आए) में सफलता हासिल कर सहकारिता विस्तार अधिकारी का पद प्राप्त किया और वर्तमान में राजगढ़ जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
परिवार और समाज का नाम किया रोशन
विष्णु गुर्जर अपने पूरे खानदान और क्षेत्र के गुर्जर समाज से पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने सरकारी नौकरी और PCS स्तर की सफलता हासिल की है। वे अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद, संघर्ष और अपनी कभी हार न मानने की जिद को देते हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट है और आप लगातार मेहनत करने से पीछे नहीं हटते, तो असफलताएं भी आपकी जीत की सीढ़ी बन जाती हैं।
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