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मवाना के कृषक इंटर कॉलेज में जनप्रतिनिधियों के शिलापट उखाड़ने पर मचा घमासान

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मवाना के कृषक इंटर कॉलेज में जनप्रतिनिधियों के शिलापट उखाड़ने पर मचा घमासान

मवाना के कृषक इंटर कॉलेज में विकास कार्यों के शिलापट हटाने से जनप्रतिनिधियों में आक्रोश

मवाना: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के मवाना स्थित कृषक इंटर कॉलेज में एक गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कॉलेज परिसर के भीतर तत्कालीन सांसदों और विधायकों द्वारा अपनी निधि से कराए गए विकास कार्यों—जैसे सीसी रोड, बरामदे और कमरों के निर्माण—के शिलापटों को कथित तौर पर उखाड़कर हटा दिया गया है। इन पत्थरों पर पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना, पूर्व विधायक अतुल खटीक, ओम प्रकाश शर्मा, प्रभु दयाल बाल्मीकि और रामचंद्र वाल्मीकि के नाम अंकित थे। इन जनप्रतिनिधियों द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों के बोर्ड हटाकर कथित तौर पर फर्जी और औचित्यहीन पत्थर लगाए जाने से राजनीतिक हलकों और क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित हुई उच्चस्तरीय जांच समिति

इस मनमानी और अनियमितता के खिलाफ पूर्व प्रधानाचार्य रामपाल सिंह तोमर, पूर्व प्रवक्ता व शिक्षक नेता चौधरी नरेश पाल सिंह, पूर्व कोषाध्यक्ष विमल कुमार, बृजपाल सिंह अहलावत और दीपक कुमार ने जिलाधिकारी मेरठ को औपचारिक शिकायत सौंपी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) मेरठ को तत्काल जांच के आदेश दिए। डीआईओएस द्वारा गठित जांच समिति में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हस्तिनापुर की प्रधानाचार्या नीतू सिंह, प्रधानाचार्य मुनीश पाल और प्राधिकरण नियंत्रक व कृषक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अमित कुमार को शामिल किया गया है।

शिकायतकर्ताओं ने सौंपे पुख्ता साक्ष्य, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

खोजी पत्रकारिता के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने जांच समिति के समक्ष सभी संबंधित दस्तावेज, तस्वीरें और जनप्रतिनिधियों के पत्र साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कर दिए हैं। शिक्षक नेता नरेश पाल सिंह ने खुलासा किया कि विकास कार्यों में खर्च हुई एक-एक पाई का हिसाब मुख्य विकास अधिकारी (CDO) मेरठ और कार्यदायी संस्था के पास सुरक्षित है। ऐसे में शिलापटों के साथ छेड़छाड़ करना और उन्हें हटाना एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। फिलहाल, शिकायतकर्ताओं ने कॉलेज के प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार और इस कृत्य में संलिप्त अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने तथा सभी जनप्रतिनिधियों के नाम वाले मूल शिलापटों को दोबारा यथास्थान स्थापित करने की पुरजोर मांग की है।

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